Follow Us:

हिमाचल में फाइनेंसियल-इमरजेंसी, MLA को सैलरी देने के पैसे नहीं: पूर्व सीएम जयराम ठाकुर

➤ नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश में “फाइनेंसियल इमरजेंसी” जैसे हालात बताए
➤ कर्मचारियों, पेंशनरों और विधायकों की सैलरी को लेकर उठाए सवाल
➤ सरकार पर खर्च और “गारंटियों” को लेकर तीखा हमला


हरियाणा के पंचकूला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल इस समय “फाइनेंसियल इमरजेंसी जैसे हालात” से गुजर रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर वेतन देने तक के संसाधन नहीं हैं, और विधायकों-मंत्रियों की सैलरी के एक हिस्से को भी टालना पड़ रहा है।

सरकार पर खर्च बढ़ाने के आरोप
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश लंबे समय तक छह मुख्य संसदीय सचिव (CPS) का बोझ झेलता रहा, जिन्हें बाद में कोर्ट के निर्देशों के बाद हटाना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में डिप्टी एडवोकेट जनरल और एडवोकेट जनरल की संख्या असामान्य रूप से बढ़ाई गई है, जिससे सरकारी खर्च और बढ़ा है।

केंद्र की मदद पर भी बयान
उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिमाचल को पहले की तुलना में ज्यादा ग्रांट मिली है।

सरकार की गारंटियों पर सवाल
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने चुनाव के दौरान “गारंटियों” के नाम पर जनता को भ्रमित किया और अब उन्हें पूरा करने में असफल रही है।